कल के समाचारों की सुर्खियों में अग्निशमन विभाग की एक इमारत के बारे में बताया गया, जो संयोगवश पास में ही छोटी थी, जब इमारत में 10 से अधिक बिंदु एक घेरे में घूम रहे थे। जब आग लगी तो छोटे मेकअप सो रहे थे, दोस्तों के क्षेत्र में मुझे बताने के लिए बुलाया गया, वास्तव में यह विश्वास नहीं हो रहा है। दूसरे दिन सुबह-सुबह दौड़कर घटनास्थल पर पहुंचे, पूरी इमारत में अंधेरा था, अभी भी धुआं निकल रहा था, लोगों को मरने के बारे में सोचने दिया। साथ ही आतंकित भी, देर रात हो चुकी थी, इमारत में कोई नहीं था, अगर पहले होता तो क्या पता और भी गंभीर परिणाम होते।
ऐसी वास्तविक बात हमारे अपने में घटी, छोटे से बड़ा कंपन बना। जीवन अप्रत्याशित है, हमें कृतज्ञ हृदय से, कृतज्ञ होकर इस समय धूप में खड़े होकर, चांदनी में नहाकर, आभारी होना चाहिए।